Success Through a Positive Mental Attitude | The Power of Mind

Success Through a Positive Mental Attitude | The Power of Mind

शक्ति व्यवस्थित और बुद्धिमत्तापूर्वक निर्देशित ज्ञान है। यहाँ “शक्ति” का अर्थ व्यवस्थित Success से है, जिससे इंसान इच्छा को इसके धनरूपी समतुल्य में रूपांतरित करने की क्षमता हासिल करता है। व्यवस्थित प्रयास एक निश्चित लक्ष्य की दिशा में दो या अधिक लोगों के सौहार्दपूर्ण, समन्वित प्रयास हैं।

मास्टर माइंड सामूहिक प्रज्ञा है, जो योजना बनाती है और योजना पर अमल करने में प्रयास को व्यवस्थित करती है। यह वह लेंस है, जो प्रकाश को काफ़ी कुछ वैसे ही केंद्रित करती है, जैसे आवर्धक लेंस का इस्तेमाल गहन गर्मी उत्पन्न करने के लिए सूर्य की किरणों को केंद्रित करने के लिए किया जा सकता है।

इच्छाएँ निष्क्रिय होती हैं, जब तक कि उन्हें कर्म में बदलने के लिए पर्याप्त शक्ति न हो। योजनाएँ वह शक्ति प्रदान करती हैं। मास्टर माइंड योजनाएँ प्रदान करता है। यह अध्याय बताएगा कि किस तरह कोई व्यक्ति मास्टर माइंड के ज़रिये शक्ति हासिल कर सकता है और इसे लागू कर सकता है।

शक्ति धन के संग्रह और इसे क़ायम रखने के लिए आवश्यक है। ज्ञान के स्रोतों को पहचानना यदि शक्ति व्यवस्थित ज्ञान है, तो शक्ति हासिल करने में ज्ञान हासिल करना शामिल है, जो निम्न स्रोतों के ज़रिये उपलब्ध है :

1. असीम प्रज्ञा : ज्ञान के इस स्रोत का दोहन सृजनात्मक कल्पना के ज़रिये किया जा सकता है, जैसा कि अध्याय 6 में बताया गया है।

2. सामान्य ज्ञान : पूरी मानव जाति का संचित अनुभव (या उसका कोई हिस्सा, जिसे सुव्यवस्थित और दर्ज किया गया है) किसी भी अच्छी सार्वजनिक लाइब्रेरी में और इंटरनेट पर मिल सकता है। इस संचित अनुभव का अहम हिस्सा सार्वजनिक स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाया जाता है, जहाँ इसे श्रेणीबद्ध व व्यवस्थित किया गया है।

3. विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान : सामान्यीकृत ज्ञान, जो किसी काम को करने, किसी लक्ष्य को हासिल करने या किसी प्रॉडक्ट को बनाने के लिए व्यवस्थित और लागू किया जाता है। आप ख़ुद विशेषज्ञतापूर्ण ज्ञान विकसित कर सकते हैं या ऐसे ज्ञान वाले व्यक्ति को नौकरी पर रख सकते हैं, उसके साथ साझेदारी कर सकते हैं या इसके लिए लेन-देन कर सकते हैं, जैसा क़दम 15 में बताया गया है।

4. प्रयोग और शोध : विज्ञान और जीवन के लगभग हर अन्य क्षेत्र में लोग हर दिन नए तथ्यों को इकट्ठा कर रहे हैं, वर्गीकृत कर रहे हैं और व्यवस्थित कर रहे हैं। जब ज्ञान के दूसरे स्रोत आवश्यक जानकारी या ज्ञान प्रदान न करें, तो हमें इसी स्रोत की ओर मुड़ना चाहिए। यहाँ भी अक्सर रचनात्मक कल्पना का प्रयोग किया जाना चाहिए।

शक्ति व्यवस्थित और बुद्धिमत्तापूर्वक निर्देशित ज्ञान है। व्यक्तियों की सीमाओं को पहचानना ज्ञान को निश्चित योजनाओं में व्यवस्थित करके और इन योजनाओं पर कर्म करके शक्ति में बदला जा सकता है।

लेकिन ज्ञान के इन चार प्रमुख स्रोतों के परीक्षण से आपको यह अहसास होता है कि अगर कोई अकेला व्यक्ति आवश्यक ज्ञान को इकट्ठा करने, उसे निश्चित, कामकाजी योजनाओं में बदलने के लिए सिर्फ अपने ही प्रयासों पर निर्भर रहे, तो उसे बहुत मुश्किलें आएँगी।

अगर उसकी योजनाएँ विस्तृत हैं और अगर वे बहुत विराट हैं, तो आम तौर पर उसे दूसरों को अपने साथ सहयोग करने के लिए प्रेरित करना चाहिए और तभी वह उन योजनाओं में शक्ति का आवश्यक तत्व भर पाएगा। मास्टर माइंड के ज़रिये शक्ति हासिल करना मास्टर माइंड किसी निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दो या दो से अधिक लोगों के ज्ञान और प्रयास का सौहार्दपूर्ण संयोजन है।

कोई भी अकेला व्यक्ति “मास्टर माइंड” की मदद के बिना भारी शक्ति हासिल नहीं कर सकता। मास्टर माइंड के ज़रिये आप एक योजना तैयार करते हैं, जो उस ज्ञान को व्यवस्थित और लागू करती है, ताकि आपके लक्ष्य को हासिल करने में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़े। (इच्छा को इसके आर्थिक समतुल्य में बदलने के उद्देश्य से व्यवस्थित योजनाएँ बनाने हेतु क़दम 14 देखें।)

अगर आप लगन और बुद्धिमत्ता से इन निर्देशों का पालन करते हैं और अपने “मास्टर माइंड” समूह के चयन में विवेक का इस्तेमाल करते हैं, तो यह मान लें कि आपने अपने उद्देश्य की दिशा में आधा सफ़र तय कर लिया है।

महान शक्ति मास्टर माइंड के सिवाय दूसरे किसी सिद्धांत से संग्रहीत नहीं की जा सकती। मास्टर माइंड की दो प्रकृतियाँ शक्ति की उन “अमूर्त” संभावनाओं को अच्छी तरह से समझना आवश्यक है, जो सही ढंग से चुने गए “मास्टर माइंड” समूह के ज़रिये आपको मिल सकती हैं। इसलिए हम यहाँ पर मास्टर माइंड सिद्धांत के दो लक्षण स्पष्ट करेंगे:

• आर्थिक : आर्थिक लाभ उन लोगों द्वारा उत्पन्न किए जा सकते हैं, जो ख़ुद को ऐसे लोगों के समूह की सलाह, परामर्श और व्यक्तिगत सहयोग से घेरे रखते हैं, जो दिल से उनकी मदद करना चाहते हैं और ऐसा पूर्ण सद्भाव से करते हैं। सहयोगपूर्ण संबंध का यह रूप लगभग हर भारी दौलत की बुनियाद रहा है। इस महान सच्चाई को समझ लेने से निश्चित रूप से आपकी आर्थिक स्थिति बदल सकती है।

• आध्यात्मिक : मानव मन ऊर्जा का रूप है और इसका एक हिस्सा आध्यात्मिक प्रकृति का है। जब दो लोगों के मस्तिष्क सौहार्द या सद्भाव में संयोजित होते हैं तो दोनों के मन की ऊर्जा की आध्यात्मिक इकाइयाँ एक सामंजस्य स्थापित कर लेती हैं, जिससे मास्टर माइंड के आध्यात्मिक रूप का निर्माण होता है।

जब दो मन एक साथ मिल जाते हैं, तो वे एक तीसरी, अदृश्य अमूर्त शक्ति बना लेते हैं, जिसे तीसरा मन कहा जा सकता है। कारनेगी के मास्टर माइंड समूह में स्टाफ़ के लगभग पचास लोग थे, जिन्हें उन्होंने अपने चारों तरफ़ इकट्ठा किया था।

उनका निश्चित लक्ष्य स्टील बनाना और बेचना था। उन्होंने अपनी पूरी दौलत का क्षेय मास्टर माइंड द्वारा हासिल शक्ति को दिया था। ऊर्जा को पदार्थ में बदलना पूरी सृष्टि में केवल दो ही ज्ञात तत्व हैं : ऊर्जा और पदार्थ। ऊर्जा के संरक्षण के वैज्ञानिक नियमों अनुसार ऊर्जा या द्रव्य न तो बनाए जा सकते हैं, न ही नष्ट किए जा सकते हैं। बस, उनका रूप बदल सकता है। आइंस्टाइन का समीकरण E=mc2 यह सुझाव देता है कि ऊर्जा को पदार्थ में बदला जा सकता है और इसका विपरीत भी किया जा सकता है।

ऊर्जा प्रकृति की सर्वव्यापी ईंट है, जिससे यह सृष्टि में ऊर्जा और पदार्थ के हर रूप का निर्माण एक ऐसी प्रक्रिया से करती है, जिसे केवल प्रकृति ही पूरी तरह समझ पाती है। सोचने में शामिल ऊर्जा के रूप में प्रकृति की यह ईंट अब हमारे लिए भी उपलब्ध है! मनुष्य के मस्तिष्क की तुलना बिजली की बैटरी से की जा सकती है।

यह ईथर से ऊर्जा सोखती है, जो पदार्थ के हर अणु में व्याप्त है और पूरी सृष्टि को उससे भर देती है। अकेली बैटरी इसमें लगे सेलों की संख्या और क्षमता के अनुपात में ऊर्जा देती है। बैटरियों का समूह किसी अकेली बैटरी की तुलना में ज़्यादा ऊर्जा प्रदान करता है।

मस्तिष्क भी इसी तरीके से काम करता है। इसी वजह से कई मस्तिष्क अन्य मस्तिष्कों की तुलना में अधिक शक्तिशाली होते हैं और इससे हम एक और महत्त्वपूर्ण तथ्य पर आते हैं : सामंजस्य के भाव में संयोजित (या जुड़ा हुआ) मस्तिष्कों का समूह किसी अकेले मस्तिष्क से अधिक विचार-ऊर्जा प्रदान करता है, जिस तरह बिजली की बैटरियों का समूह किसी अकेली बैटरी की तुलना में ज़्यादा ऊर्जा प्रदान करता है।

इस तुलना से यह तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि मास्टर माइंड सिद्धांत में शक्ति का रहस्य शामिल है, जिसके द्वारा उन व्यक्तियों को शक्ति प्राप्त होती है जो दूसरे बुद्धिमान इंसानों द्वारा ख़ुद को घेरे रहते हैं।

इससे एक और विचार मिलता है जो हमें मास्टर माइंड सिद्धांत के आध्यात्मिक स्वरूप की समझ के और भी क़रीब ले जाएगा: जब व्यक्तिगत मस्तिष्कों का समूह सामंजस्य की भावना से संयोजित होता है और मिलकर काम करता है, तो इस गठबंधन से बढ़ी हुई ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो उस समूह के हर व्यक्तिगत मस्तिष्क के लिए उपलब्ध होती है।

अपने मास्टर माइंड समूह को एकत्रित करना अपने मास्टर माइंड समूह को बनाते समय इन दिशानिर्देशों का पालन करें:

एक व्यापक समूह बनाएँ : पुरुषों और महिलाओं दोनों को शामिल करें, जिनका ज्ञान और जानकारी दूसरे सदस्यों की पूरक हो, न कि दोहराती हो।

ऐसे लोगों को नियुक्त करें, जो हों: . – बुद्धिमान – सृजनात्मक . सकारात्मक – समर्थक – सहयोगी – ईमानदार . उदार

• किसी तरह का भुगतान प्रदान करें: आप उन्हें पैसे दे सकते हैं, उनके साथ साझेदारी कर सकते हैं, सेवा प्रदान कर सकते हैं, अपने कारोबार का निश्चित प्रतिशत लाभ दे सकते हैं या किसी अन्य प्रकार का भुगतान दे सकते हैं, लेकिन उनसे मुफ्त में सहयोग की उम्मीद न करें, जब तक कि वे इसकी पेशकश ही न करें। याद रखें : उनका समय बर्बाद न करें।

मीटिंगों के लिए तैयार होकर आएँ और मीटिंगों का कुशलता से प्रबंधन करें। किसी मास्टर माइंड समूह के मूल्यवान सदस्य आम तौर पर व्यस्त लोग होते हैं, जो अपने खुद के लक्ष्य का पीछा कर रहे होते हैं। मास्टर माइंड की सफलता की कहानियाँ किसी भी व्यक्ति के रिकॉर्ड का विश्लेषण करें, जिसने भारी दौलत हासिल की है।

सामान्य दौलत हासिल करने वाले लोगों का भी विश्लेषण करें। विश्लेषण के बाद आप पाएंगे कि उन्होंने चेतन या अचेतन रूप से मास्टर माइंड सिद्धांत का इस्तेमाल किया है, जैसा सफलता की कहानियों में आगे बताया गया है।

हेनरी फोर्ड हेनरी फ़ोर्ड ने अपना बिज़नेस करियर ग़रीबी, अशिक्षा और अज्ञान की बाधाओं के बीच शुरू किया। दस साल के कम समय में ही फ़ोर्ड ने इन तीनों बाधाओं को पार कर लिया और पच्चीस साल में अमेरिका के सबसे अमीर आदमियों में से एक बन गए।

इसके साथ यह बात भी जोड़ दें कि फ़ोर्ड की प्रगति के सबसे तेज़ क़दम उस समय उठे, जब वे थॉमस अल्वा एडिसन के व्यक्तिगत मित्र बन गए और तब आप यह समझने लगेंगे कि एक मस्तिष्क का दूसरे पर प्रभाव कितना फ़र्क पैदा कर सकता है।

एक क़दम आगे जाकर इस तथ्य पर विचार करें कि फ़ोर्ड की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ उस समय से शुरू हुई, जब उनका परिचय हार्वे फ़ायरस्टोन, जॉन बरोज़, और लूथर बरबैंक (जिसमें से हर एक की मानसिक क्षमता ज़बर्दस्त थी) से हुआ और आपको इस बात का अधिक प्रमाण मिल जाएगा कि मस्तिष्कों के मैत्रीपूर्ण गठबंधन से ही शक्ति मिलती है।

इस बारे में कोई शक नहीं है कि हेनरी फ़ोर्ड कारोबारी और औद्योगिक जगत के सबसे जानकार लोगों में से एक थे। उनकी दौलत के प्रश्न पर विचार करने की ज़रूरत नहीं है। फ़ोर्ड के अंतरंग व्यक्तिगत मित्रों का विश्लेषण करें, जिनमें से कुछ का ज़िक्र पहले ही किया जा चुका है और आप नीचे दिए कथन को समझने के लिए तैयार होंगे: इंसान उन लोगों का स्वभाव, आदतें और विचार की शक्ति ग्रहण कर लेता है, जिनके साथ वह सहानुभूति और सामंजस्य की भावना के साथ उठता-बैठता है।

फ़ोर्ड ने ग़रीबी, निरक्षरता और अज्ञान को इसलिए हराया, क्योंकि उन्होंने खुद को महान मस्तिष्कों के साथ जोड़ लिया था, जिनके विचार की तरंगें उन्होंने अपने खुद के मस्तिष्क में ग्रहण कर लीं। एडिसन, बरबैंक, बरोज़ और फ़ायरस्टोन के साथ संबंध बनाकर फ़ोर्ड ने अपनी मानसिक शक्ति में इन चार लोगों की बुद्धि, अनुभव, ज्ञान और आध्यात्मिक शक्तियाँ भी जोड़ ली।

यही नहीं, उन्होंने मास्टर माइंड सिद्धांत का उपयोग भी किया, जिसका तरीक़ा इस पुस्तक में बताया जा रहा है। यह सिद्धांत आपके लिए भी उपलब्ध है! इंसान उन लोगों का स्वभाव, आदतें और विचार की शक्ति ग्रहण कर लेता है, जिनके साथ वह सहानुभूति और सामंजस्य की भावना के साथ उठता-बैठता है।

राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूज़वेल्ट राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूज़वेल्ट देहात के सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्क वाले लोगों को वॉशिंगटन लाए और उन्होंने एक मास्टर माइंड समूह बनाया, जिसे वे अपना “मानसिक ट्रस्ट” कहते थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और इसके बाद सरकार और उद्योग के लीडरों ने अक्सर अति महत्त्वपूर्ण समस्याओं से निबटने के लिए “थिंक टैंक” कहे जाने वाले मास्टर माइंड समूहों का आह्वान किया है।

महात्मा गाँधी गाँधीजी के बारे में जितने अमेरिकी लोगों ने सुना है, उनमें से ज़्यादातर शायद उन्हें अजीब सा छोटा आदमी मानेंगे, जो भिखारियों जैसी पोशाक पहनते थे और जिसने ब्रिटिश सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी की थीं।

दरअसल गाँधीजी अजीब नहीं थे; वे तो अपनी पीढ़ी के सबसे शक्तिशाली इंसान थे (उनके अनुयायियों की संख्या और अपने लीडर में उनकी आस्था के आधार पर)। यही नहीं, वे शायद अब तक जीवित सबसे शक्तिशाली इंसान थे।

उनकी शक्ति गुप्त थी, लेकिन यह वास्तविक थी। आइए हम अध्ययन करते हैं कि उन्होंने किस तरह इतनी ज़बर्दस्त शक्ति हासिल की। इसे कुछ शब्दों में स्पष्ट किया जा सकता है। उन्हें शक्ति इस बात से मिली, क्योंकि उन्होंने बीस करोड़ लोगों को तन-मन से, सामंजस्य की भावना से एक निश्चित लक्ष्य के लिए संयोजित किया।

संक्षेप में, गाँधीजी ने एक चमत्कार कर दिया, क्योंकि बीस करोड़ लोगों को किसी बात के लिए मजबूर करने के बजाय सामंजस्य की भावना के साथ असीमित समय तक सहयोग करने के लिए प्रेरित करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

अगर आपको इसके चमत्कार होने में संदेह है, तो आप सिर्फ दो लोगों को सामंजस्य की भावना के साथ सहयोग करने के लिए प्रेरित करके देखें – चाहे इसकी अवधि कितनी भी लंबी हो। हर व्यवसायी जानता है कि कर्मचारियों से सामंजस्य और सद्भाव से काम करवाना कितना मुश्किल होता है।

शक्ति के मुख्य स्रोतों की सूची में आपने देखा है कि असीम प्रज्ञा सबसे ऊपर आती है। जब दो या दो से अधिक लोग सद्भाव की भावना से संयोजित होते हैं और किसी निश्चित लक्ष्य की ओर काम करते हैं, तो इस गठबंधन द्वारा वे ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं, जहाँ वे असीम प्रज्ञा के शाश्वत ख़ज़ाने से सीधे शक्ति हासिल कर सकते हैं।

यह शक्ति का महानतम स्रोत है। यह वह स्रोत है, जिसकी तरफ़ जीनियस और हर महान लीडर मुड़ता है (चाहे वे इस तथ्य से परिचित हों या न हों।) शक्ति हासिल करने के तीन अन्य मुख्य स्रोत भी उतने ही विश्वसनीय हैं, जितनी कि मनुष्य की पाँच इंद्रियाँ। इंद्रियाँ हमेशा विश्वसनीय नहीं होतीं।

दूसरी तरफ़, असीम प्रज्ञा कभी ग़लती नहीं करती। ऐंडू ग्रव अपना खुद का मास्टर माइंड समूह बनाने के लिए आपके कर्मचारी सबसे अच्छे स्रोत हैं। इंटेल कॉरपोरेशन के बेहद सफल सीईओ ऐंडू ग्रव ने यही किया था।

ग्रव एक अनौपचारिक कामकाजी प्रतिस्पर्धा में लगभग 30 दिन बचे थे और मैं जब कमरे में गया, तो हमारे 15 कर्मचारी कह रहे थे, “हम शायद जीत नहीं सकते, लेकिन यह बेहतरीन अनुभव होगा।”

मैंने उछलकूद नहीं की और कर्मचारियों को कच्चा नहीं चबाया। मैं बस ब्लैकबोर्ड तक चलकर गया और वे सात मानदंड लिखे, जिन पर हमारा मूल्यांकन होने वाला था।

फिर अच्छी सी, धीमी आवाज़ में मैंने कहा, “हम उन्हें सात-शून्य से हराने जा रहे हैं।” उसी दिन हम जीत गए। पेरट ने टिप्पणी की कि इस प्रोजेक्ट को जीतने से जो वेतन वृद्धियाँ हुईं, बोनस दिए गए, स्टॉक ऑप्शन्स दिए गए और हज़ारों नई नौकरियाँ दी गईं, वे इस बड़े अनुबंध को हासिल करने के मूर्त पुरस्कार थे।

लेकिन उन्हें यक़ीन है कि ज़्यादा महत्त्वपूर्ण यह जानने की परम संतुष्टि थी कि अपनी कड़ी मेहनत और सृजनात्मकता से उन्होंने संसार की सर्वश्रेष्ठ कंपनी को हरा दिया था। इसी से कंपनी महान बनती है – एक टीम जो विरोधी को हराने के लिए मिलकर काम करती है।

हासिल शक्ति के लाभ पाना जब पैसा भारी मात्रा में आता है, तो यह इंसान की ओर उतनी ही आसानी से प्रवाहित होता है, जितनी आसानी से पानी पहाड़ी से नीचे की ओर बहता है।

शक्ति की एक महान अदृश्य धारा मौजूद है, जिसकी तुलना एक नदी से की जा सकती है, सिवाय इसके कि इसका एक सिरा एक दिशा में बहता है और जो लोग धारा की उस दिशा से इसमें प्रवेश करते हैं, यह धारा इन्हें दौलत की तरफ़ ऊपर ले जाती है।

दूसरा सिरा इसकी विपरीत दिशा में बहता है और जो लोग इतने दुर्भाग्यशाली होते हैं कि वे इस सिरे से इसमें जाते हैं (और खुद को इससे बाहर नहीं निकाल पाते हैं), उन्हें ग़रीबी और दुख की तरफ़ नीचे ले जाया जाता है। जिसने भी प्रचुर दौलत हासिल की है, वह हर इंसान जीवन की इस नदी के अस्तित्व को पहचानता है।

इसका संबंध इंसान की चिंतन प्रक्रिया से है। सकारात्मक भाव नदी का वह किनारा हैं, जो इंसान को दौलत की तरफ़ ले जाता है। नकारात्मक भाव नदी का वह किनारा हैं, जो इंसान को ग़रीबी की तरफ़ नीचे ले जाता है। यह उस व्यक्ति के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण विचार है, जो दौलत हासिल करने के उद्देश्य से यह पुस्तक पढ़ रहा है।

अगर आप शक्ति की नदी के उस किनारे पर हैं जो ग़रीबी की तरफ़ ले जाता है, तो यह पुस्तक चप्पू का काम कर सकती है, जिससे आप खुद को नदी के दूसरे किनारे की ओर धकेल सकते हैं। यह आपकी मदद केवल तभी कर सकती है, जब आप इस पर अमल करें और इसका इस्तेमाल करें।

सिर्फ़ पढ़ने से और इसे भला-बुरा कहने से आपको कोई फायदा नहीं होगा। कुछ लोग नदी के सकारात्मक और नकारात्मक किनारों के बीच अदला-बदली के अनुभव से गुज़रते हैं; कभी वे सकारात्मक किनारे पर होते हैं, तो कभी नकारात्मक किनारे पर।

1929 में वॉल स्ट्रीट के गोते और 2008 के वित्तीय संकट ने लाखों लोगों को नदी के सकारात्मक किनारे से नकारात्मक किनारे की ओर धकेल दिया। ये लाखों लोग नदी के सकारात्मक किनारे की ओर लौटने के लिए जूझते रहे – कुछ तो हताशा और डर में।

यह पुस्तक ख़ास तौर पर उन्हीं लाखों लोगों के लिए लिखी गई थी। ग़रीबी और अमीरी अक्सर जगह बदल लेती हैं। ग़रीबी स्वेच्छा से अमीरी की जगह ले सकती है और आम तौर पर लेती भी है।

लेकिन जब अमीरी ग़रीबी की जगह लेती है, तो यह परिवर्तन आम तौर पर सुविचारित और सावधानीपूर्वक अमल में लाई गई योजनाओं से होता है। ग़रीबी को योजना की कोई ज़रूरत नहीं होती। इसे किसी की मदद की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि यह साहसी और निर्मम होती है।

अमीरी संकोची और शर्मीली होती है। इसे “आकर्षित” करना होता है। कोई भी अमीरी की हसरत कर सकता है और ज़्यादातर लोग करते भी हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दौलत की धधकती इच्छा के साथ जुड़ी निश्चित योजना ही दौलत के संग्रह का एकमात्र विश्वसनीय तरीक़ा है।

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